क़ज़ाये उमरी नमाज़: मसाइल और तरीक़ा

क़ज़ाये उमरी की नमाज़ का मतलब होता है जो हमारी पहले की नमाज़ें छूटी हुई हैं उनको अदा करना, उसके लिए सबसे पहले कितनी नमाज़ें छूटी हुई हैं उनका हिसाब लगा लें और एक तरफ से पढ़ते जाएं क़ज़ा नमाज़ों को अदा करने के कुछ मसाइल सबसे पहले हिसाब लगा लें कि कितनी नमाज़ें क़ज़ा हैं, बल्कि थोड़ा ज्यादा ही रहे पर कम न हो आगर याद न हो कि कब से क़ज़ा है तो लड़का 12 से 15 साल के दरमियान बालिग़ होता है और लड़की 9 से 12…

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