राजनीतिक 

चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल ?

लेखक: सिद्दीक़ी मुहममद ऊवैस, महाराष्ट्र हमारे देश भारत में साल भर विभिन्न प्रकार के त्यौहार मनाए जाते हैं जिनमें एक त्यौहार देश के हर नागरिक के लिए महत्वपूर्ण होता है, जो साल के बारह माह देश के किसी न किसी हिस्से में जारी रहता है, मैं बात कर रहा हूँ चुनावों की । इसी तरह इन दिनों पाँच राज्यों में चुनावों का मौसम खुब ज़ोर शोर से चल रहा है, जिनमें पश्चिम बंगाल, असम, पूदूचेरी, केरल और तामिल नाड शामिल हैं । और हाल ही में उत्तर भारत के दो…

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कविता 

लाज़िम है

✍🏻सिद्दीक़ी मुहममद ऊवैस जब बातिल का बोलबाला हो,ज़ालिम सब पर हावी हो,न्याय टकों पे बिकता हो,नफ़रत की राजनीति,जगह जगह पर चलती हो,सत्ता धारी अहंकार में डूबे हों,सरकारें झूठ पर चलती हों,हक़ को सिरे से दबाया जाता हो,सच्चाई से मुंह मोड़ा जाता हो?सवालों से कतराया जाता हो,जनता का विश्वास तोड़ा जाता हो,मासूमों को बेकसूरों को…रास्ते से हटाया जाता हो,लोकशाही को सरेआम कुचला जाता हो,तानाशाही का डंका बजाया जाता हो,ऐसे में हक़ की स्याही से..सच्चाई के शब्द लिखना,बेझिझक, बेबाक बोलना,हर शहरी का हर आन बोलना,न्याय की ख़ातिर लड़ना,आवाज़ बुलंद करना,लाज़िम है………….!!!!!!!

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कविता लेख 

हिसाब

सिद्दीक़ी मुहममद ऊवैस सोचा आज..हिसाब कर दूँ…बीते वक़्त का हिसाब…पिछली यादों का…लम्हों का…बीती बातों का हिसाब…अब तक की…ज़िंदगी का हिसाब…बरसों पहले…साथ छोड़ने वाले…बचपन का हिसाब…फ़िर हर एक पल को…सिरे से याद किया हमने…अब तक क्या पाया…क्या खोया… क्या कमाया…कितना लूटाया…लेकिन मुश्किल था ये सब…बहुत ज़ोर दिया अक़्ल पर…दिमाग खपाया… बावजूद इसके….कुछ याद ना आया…बढ़ती उम्र… गुज़रते दिन..हवा सी तेज़ ज़िंदगी…बस इन्हें साथ पाया…!!!!

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