क्या किसी पेड़ या ताक़ पर वली और शहीद रहते हैं?

कुछ लोग कहते हैं कि फुलां ताक़ या दरख़्त (पेड़) पर शहीद या वली रहते हैं और उस दरख़्त या ताक़ के पास जा कर फ़ातिहा दिलाते हैं, हार, फूल, खुश्बू वगैरह डालते हैं, लोबान या अगरबत्ती सुलगाते हैं, और वहां मुरादें मांगते हैं, ये सब ख़िलाफ़े शरअ, जहालत और ग़लत बातें है, जो जहालत की वजह से अवाम में राएज हो गयी हैं और उनको दूर करना निहायत ज़रूरी है, हक़ ये है कि ताक़ों, मेहराबों और दरख़्तों पर महबूबाने ख़ुदा का क़याम मान कर वहां हाज़िरी नियाज़, फ़ातिहा,…

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