क़ज़ाये उमरी नमाज़: मसाइल और तरीक़ा

क़ज़ाये उमरी की नमाज़ का मतलब होता है जो हमारी पहले की नमाज़ें छूटी हुई हैं उनको अदा करना, उसके लिए सबसे पहले कितनी नमाज़ें छूटी हुई हैं उनका हिसाब लगा लें और एक तरफ से पढ़ते जाएं क़ज़ा नमाज़ों को अदा करने के कुछ मसाइल सबसे पहले हिसाब लगा लें कि कितनी नमाज़ें क़ज़ा हैं, बल्कि थोड़ा ज्यादा ही रहे पर कम न हो आगर याद न हो कि कब से क़ज़ा है तो लड़का 12 से 15 साल के दरमियान बालिग़ होता है और लड़की 9 से 12…

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धार्मिक 

नमाज़े चाश्त का तरीक़ा

नमाज़े चाश्त का वक़्तसूरज निकलने के 20 मिनट बाद से ले कर ज़हवये क़ुबरा यानी ज़वाल से पहले तक है, लेकिन ईद के दिन ईद की नमाज़ के बाद पढ़ना होता है नमाज़े चाश्त में काम से कम 2 रकअत और ज़्यादा से ज़्यादा 12 रकअत हैं और अफ़ज़ल 12 रकअत हैं, अब जो जितनी चाहे पढ़ सकता हैइसके लिए कोई खास तरीक़ा नही है जैसे आम नफ़्ल या सुन्नत की नमाज़ पढ़ते हैं बस वैसे ही पढ़ना हैअब आप चाहे 2 रकअत ही पढ़ें या 4 रकअत या 12,…

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