खुदकुशी

कई दिन से फेसबुक पर उस लड़की की वजह से एक ऊधम बरपा है….हर कोई उसे मज़लूम और लाचार साबित करने पर तुला है…हालांकि……. खुदकुशी करने वाला कितना ही मज़लूम और बेबस क्यूं ना हो….. किसी तौर पर क़ाबिले हमदर्दी नहीं हो सकता… क्यूंकि खुदकुशी इस्लाम में हराम है और हराम का इर्तिकाब करने वाले की हौसला शिकनी करनी चाहिए…..कितनी मज़लूम थी?कितनी लाचार थी?कैसे हालात थे? खातूने जन्नत फातिमा ज़हरा رضی اللہ عنہا से ज़्यादा मुश्किल हालात थे क्या?…. जिनके हाथ चक्की पीसने के सबब गट्टे पड़े थे- जिस्म पर…

Read More