राजनीतिक 

क्या भारत में मुस्लिम नेतृत्व संभव है?

मुहम्मद ज़ाहिद अली मरकज़ी, कालपी शरीफअध्यक्ष तहरीक-ए-उलमा ए बुंदेलखण्ड। बहुत से मुस्लिम बुद्धिजीवी आज कल मजलिस (AIMIM) के नेतृत्व और भागीदारी वाली राजनीति को पूर्ण रूप से नकारते हुए नजर आते हैंउनका मानना ​​है कि भारत में मुस्लिम नेतृत्व सिर्फ एक सपना है और कुछ नहीं। वो चाहते हैं कि भारतीय मुसलमान नेतृत्व के बजाय अपना ध्यान न्यूट्रल कर ले और चुपचाप भाजपा के खिलाफ जाकर अपनी भूमिका निभाये। उनकी अपनी आशंकायें हैं जो उनकी अपनी सोच के अनुसार सही भी हो सकती हैं। हम उनके इरादों पर भी प्रश्नचिन्ह…

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गलत फहमियो का निवारण राजनीतिक सामाजिक 

आतँकवाद: हक़ीक़त और साज़ीश?

सवाल:- मुस्लिम जिहाद करने के लिए आतँकी संघटन क्यों बनाते हैं..? जवाब:- पहले तो इस सवाल करने वाले को अपनी बुध्दि का थोड़ा इस्तेमाल करना चाहिए और सोचना चाहिए कि विश्वश्व में 180 करोड़ (1.8 Billion) मुस्लिम हैं और अगर क़ुरआन पढ़ कर लोग आतंकवादी बन रहे होते या वो आतँकी संघटन बना रहे होते तो आज दुनिया की क्या हालत हुई होती ? अतः यह सवाल और सोच ही बिल्कुल निराधार है। दूसरी बात अगर आतँकी संघटन बनाना मुस्लिमो के धर्म ग्रन्थ में होता तो आज विश्व में सबसे…

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राजनीतिक 

कब तक चलेगा किसानों का आंदोलन।

साजीद महमूद शेख,मीरा रोड जिला ठाणे महोदय,किसानों ने अब कृषि कानूनों के खिलाफ अपना आंदोलन तेज कर दिया है। वे अब संसद के मानसून सत्र के दौरान प्रतिदिन संसद के बाहर प्रदर्शन करेंगे । जाहिर है कि इन प्रदर्शनों से किसान अब देश का ध्यान फिर से आंदोलन की ओर लाना चाहते हैं। लेकिन सवाल यह है कि किसान आंदोलन कब तक चलेगा। यह चिंता की बात है। इस आंदोलन को सात महीनों से अधिक समय हो चुका है। और अभी तक सरकार या किसानों की ओर से कोई ठोस…

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राजनीतिक 

चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल ?

लेखक: सिद्दीक़ी मुहममद ऊवैस, महाराष्ट्र हमारे देश भारत में साल भर विभिन्न प्रकार के त्यौहार मनाए जाते हैं जिनमें एक त्यौहार देश के हर नागरिक के लिए महत्वपूर्ण होता है, जो साल के बारह माह देश के किसी न किसी हिस्से में जारी रहता है, मैं बात कर रहा हूँ चुनावों की । इसी तरह इन दिनों पाँच राज्यों में चुनावों का मौसम खुब ज़ोर शोर से चल रहा है, जिनमें पश्चिम बंगाल, असम, पूदूचेरी, केरल और तामिल नाड शामिल हैं । और हाल ही में उत्तर भारत के दो…

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राजनीतिक 

हाथरस की नाकामी पर पी एफ की चादर

लेखक: डाक्टर सलीम खान योगी सरकार का ताजा कारनामा ये है कि उसने हाथरस के बदनामे जमाना एस पी विक्रांत वीर की मुलाजमत बहाल कर दी। इस मज़मूम कार्रवाई की पर्दापोशी के लिए पापूलर फ्रंट के शाहीन बाग दफ्तर पर छापा मार दिया गया ताकि सारा मीडीया पी एफ आई के पीछे लगा रहे और योगी के मंजूरे नजर की जानिब किसी की नजर न जाने पाए। ये दोनों काम सिर्फ एक दिन के फर्क से हुए बल्कि पी एफ आई की तलबा तंजीम सी एफ आई के जनरल सेक्रेटरी…

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पंजाब & हरयाणा राजनीतिक 

पंजाब में हार

लेखक: डाक्टर सलीम खान पिछले दिनों मुल्क के एक सिरे पर क्रिकेट का टेस्ट मैच खेला जा रहा था और दूसरे पर इंतिख़ाबात हो रहे थे । इन दोनों के दिलचस्प नताइज सामने आए। पहले टेस्ट में शिकस्ते फाश से दो-चार होने वाली हिन्दुस्तान की टीम ने इंगलैंड को दूसरे टेस्ट मैच में 317 रन से हरा कर चेन्नई टेस्ट जीत में तारीख़ रकम कर दी । इसी तरह पिछली मर्तबा 7 में से 5 शहरों में कामयाब होने वाले बी जे पी अकाली दल का इस बार मुकम्मल सफाया…

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धार्मिक राजनीतिक 

ख्वाजा ग़रीब नवाज़ (3)

लेखक:नौशाद अह़मद ज़ैब रज़वी, इलाहाबाद ये बात सही है कि ख्वाजा गरीब नवाज़ रज़ियल्लाहु तआला अन्हु के आने से कई सौ बरस पहले हिंदुस्तान में इस्लाम आ चुका था जैसा कि मशहूर है कि सुल्तान महमूद गज़नवी रहमतुल्लाह तआला अलैहि के 17 हमले हिंदुस्तान पर हो चुके थे,मगर इस्लाम को फरोग़ मिला है तो सरकार गरीब नवाज़ की आमद के बाद 📕 अलमलफूज़,हिस्सा 1,सफह 104 आपकी आमद अजमेर शरीफ में 10 मुहर्रम 561 हिजरी में हुई 📕 महफिले औलिया,सफह 342 चन्द करामतें अजमेर शरीफ पहुंचकर आपने एक दरख्त के नीचे…

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राजनीतिक 

लल्लन और कल्लन का बजट

डाक्टर सलीम खान कल्लन स्वामी को नई ठाट बाट के साथ आते देखकर लल्लन शाह ने कहा ओहो आज इधर कैसे आ पड़े?कल्लन हंसकर बोला घबराने की जरूरत नहीं मैं तेरे एरिया में धंधा करने के लिए नहीं अपनी चाची से मिलने आया हूँ।लल्लन बोला यार तेरा हुलिया देखकर तो ऐसा लगता है कि तू ने धंधा बदल दिया है।कैसी बातें करते हो लल्लन । इतना आरामदेह और मुनाफाबख्श कारोबार भला कौन बदल सकता है।मैं समझा नहीं कल्लन । कारोबार तो सभी मुनाफाबख्श होते हैं लेकिन फिर भी लोग उनको…

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राजनीतिक 

कौमी बजट हुकूमत की किसान-दुश्मनी का आईना

लेखक: डाक्टर सलीम खान वजीरे आजम नरेंद्र मोदी ने देही अवाम और किसान को इस बजट की रूह करार दिया लेकिन जैसा कि माद्दा परस्ताना जिंदगी में रुहानी जरूरियात नजरअंदाज हो जाती हैं उसी तरह का मामला इस बार किसानों के साथ हुआ। हैरत इस बात पर है कि ऐसा उस समय है जब मुल्क में दुनिया की सबसे बड़ी किसानों की तहरीक बामे उरूज पर है । ऐसे में जब कि किसान कर्ज माफी की उम्मीद कर रहे थे वजीरे आजम ने बजट के तहत किसानों की आमदनी में…

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राजनीतिक 

बजट से संघ परिवार की नाराजगी और बेचारगी

लेखक: डाक्टर सलीम खान 7 साल पहले फरवरी के महीने में गुजरात के वजीरे आला नरेंद्र मोदी ने अपने सूबे की राजधानी अहमदाबाद में एक जलसा से खिताब करते हुए प्रसून जोशी की एक नज्म झूम-झूम कर पढ़ी तो सारा देश झूम उठा । उस नज्म का एक मिसरा था:सौगंध मुझे इस मिट्टी की , मैं देश नहीं बिकने दूँगामोदी जी उस वक्त वजीरे आजम बनने के लिए हाथ पैर मार रहे थे । देश के अवाम ने उनके ऐलान पर एतिमाद किया और उनको वजीरे आजम बना दिया ।…

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