धार्मिक सामाजिक 

बहुविवाह और भारतीय धर्म-संस्कृति

ग़ुलाम मुस्तफा नईमी, दिल्ली इसे प्रोपगंडे का प्रभाव कहें या अपनी ही धार्मिक शिक्षाओं को न जानने का नुकसान कि इस देश के अधिकांश लोग इस्लाम और मुसलमानों से उन चीजों की वजह से नफरत करने लगे हैं जो उनकी अपनी संस्कृति और सभ्यता का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं। इन्हीं महत्वपूर्ण मुद्दों में बहुविवाह भी शामिल है। बहुविवाह का अर्थ है एक से अधिक विवाह, जिसे अंग्रेजी में polygamy कहा जाता है। कुछ शातिर लोगों ने मुसलमानों को बदनाम करने के लिए “हम दो हमारे पच्चीस” और “हम चार हमारे…

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राजनीतिक 

क्या भारत में मुस्लिम नेतृत्व संभव है?

मुहम्मद ज़ाहिद अली मरकज़ी, कालपी शरीफअध्यक्ष तहरीक-ए-उलमा ए बुंदेलखण्ड। बहुत से मुस्लिम बुद्धिजीवी आज कल मजलिस (AIMIM) के नेतृत्व और भागीदारी वाली राजनीति को पूर्ण रूप से नकारते हुए नजर आते हैंउनका मानना ​​है कि भारत में मुस्लिम नेतृत्व सिर्फ एक सपना है और कुछ नहीं। वो चाहते हैं कि भारतीय मुसलमान नेतृत्व के बजाय अपना ध्यान न्यूट्रल कर ले और चुपचाप भाजपा के खिलाफ जाकर अपनी भूमिका निभाये। उनकी अपनी आशंकायें हैं जो उनकी अपनी सोच के अनुसार सही भी हो सकती हैं। हम उनके इरादों पर भी प्रश्नचिन्ह…

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गलत फहमियो का निवारण राजनीतिक सामाजिक 

आतँकवाद: हक़ीक़त और साज़ीश?

सवाल:- मुस्लिम जिहाद करने के लिए आतँकी संघटन क्यों बनाते हैं..? जवाब:- पहले तो इस सवाल करने वाले को अपनी बुध्दि का थोड़ा इस्तेमाल करना चाहिए और सोचना चाहिए कि विश्वश्व में 180 करोड़ (1.8 Billion) मुस्लिम हैं और अगर क़ुरआन पढ़ कर लोग आतंकवादी बन रहे होते या वो आतँकी संघटन बना रहे होते तो आज दुनिया की क्या हालत हुई होती ? अतः यह सवाल और सोच ही बिल्कुल निराधार है। दूसरी बात अगर आतँकी संघटन बनाना मुस्लिमो के धर्म ग्रन्थ में होता तो आज विश्व में सबसे…

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गलत फहमियो का निवारण धार्मिक 

“मैं जीव हूँ मांस नहीं” के पोस्टर मुस्लिमो के खिलाफ नफ़रत और ज़हर फैलाने का एजेंडा

सवाल:- ईद उल अज़हा के मौके पर कई जगह पोस्टर लगाए जाते हैं और खबरें चलाई जाती हैं जिनमे जानवरो की तस्वीर होती है और लिखा होता है “में जीव हूँ मांस नहीं” या दूसरे प्रकार से ईद के बारे में आपत्ति ली जाती है इस बारे में जवाब दें? जवाब:-  मैं भी जीव हूँ, माँस नही। इस तरह के पोस्टर सिर्फ़ ईद-उल-अज़हा के मौके पर ही क्यों लगाए जाते हैं? या इस तरह की बातें ईद के बारे में ही क्यों चलाई जाती हैं ? भारत की कुल 71% जनता…

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गलत फहमियो का निवारण धार्मिक 

क्या इस्लाम में मांसाहारी होना ज़रूरी है

सवाल: क्या इस्लाम में मांसाहारी होना ज़रूरी है? माँसाहार के लिए जीव हत्या क्यों कि जाती है? जवाब:- माँसाहार इस्लाम में अनिवार्य (फ़र्ज़ नहीं है) एक मुसलमान पूर्ण शाकाहारी होने के बावजूद एक अच्छा मुसलमान हो सकता है। मांसाहारी होना एक मुसलमान के लिए ज़रूरी नहीं है। यह भी एक भ्रांति है कि सिर्फ मुस्लिम ही मांसाहार करते हैं ।जबकि तथ्य यह है कि विश्व की लगभग 90 % जनता और खुद हमारे भारत देश की 70% जनता मांसाहारी है। विश्व के किसी भी प्रमुख धर्म में माँसाहार को वर्जित…

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राजस्थान सामाजिक 

ग़ौसे आज़म फाउंडेशन ने देश की एक और ग़रीब बेटी की मदद किया

जयपुर स्थित झोटवाड़ा में ग़ौसे आज़म फाउंडेशन के पंजीकृत कार्यालय से आज शादी के लिए ग़ौसे आज़म फाउंडेशन ने देश की एक और ग़रीब बेटी की मदद किया। उसे 15 हज़ार 786 रूपये के साथ साथ एक प्रेस और 36 बर्तनों का सेट दिया। यह मदद उत्तर प्रदेश के ज़िला गोरखपुर के ग़ौसे आज़म फाउंडेशन के ज़िला अध्यक्ष समीर अली के कहने पर दिया गया। ग़ौसे आज़म फाउंडेशन के संस्थापक व राष्ट्रीय अध्यक्ष हज़रत मौलाना मोहम्मद सैफुल्लाह ख़ां अस्दक़ी, चिश्ती, क़ादरी ने कहा कि राष्ट्रवादी एनजीओ, ग़ौसे आज़म फाउंडेशन पुरे…

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राजस्थान सामाजिक 

ग़रीब लड़की को ग़ौसे आज़म फाउंडेशन ने 51 हज़ार 7 सौ 86 रूपये दिया

राष्ट्रवादी एनजीओ, ग़ौसे आज़म फाउंडेशन बहुत ही कम समय में बहुत बड़े-बड़े काम कर चुका है और पुरे भारत में ग़रीबों और हक़ीक़ी ज़रूरतमंदों की अनेकों प्रकार से मदद कर चुका है और इं शा अल्लाह! आगे भी अनेकों प्रकार से भारत के असहाय लोगों की मदद करता रहेगा। पुरे भारत में ग़ौसे आज़म फाउंडेशन लगातार किसी न किसी हक़ीक़ी ज़रूरतमंद की मदद कर रहा है। इसी क्रम में कर्नाटक की एक ग़रीब बेटी की शादी के लिए ग़ौसे आज़म फाउंडेशन ने उस ग़रीब लड़की को 51 हज़ार 7 सौ…

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सामाजिक 

सोशल मीडिया और बहकते नौजवान

ग़ुलाम मुस्तफा नईमीरौशन मुस्तक़बिल दिल्ली जब से सोशल मीडिया पर शॉर्ट वीडियो ऐप लॉन्च हुए हैं, तब से हमारे चारों ओर अभिनेताओं, जोकरों, नर्तकियों और मिमक्री करने वालों की पूरी फौज तैयार हो गई है, लड़कों के साथ-साथ लड़कियां भी इस झुंड में शामिल हैं। पहले लोग इन वीडियो ऐप का इस्तेमाल केवल सस्ते मनोरंजन के लिए करते थे इसलिए ज्यादा चलन नहीं था। लेकिन जब वीडियो के जरिए पैसा कमाने का विकल्प मिला तो पिछड़े से पिछड़े गांव देहात के लड़के-लड़कियों ने भी वो तूफ़ान मचाया कि अल्लाह की…

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शिक्षा सामाजिक 

बच्चों की तरबीयत

आप ने अक्सर देखा होगा कि, वालिदेन बच्चों को जिन, बला, या किसी जानवर से डराते हैं। और बच्चे भी वक़्ती तोर पर डर जाते हैं, लेकिन जब बच्चे समझदार हो जाते हैं तो उनके दिलों से इन चीज़ों का डर निकल जाता है। इसलिये हमें चाहिए कि बच्चों के दिलों में अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त का और जहन्नम के अजा़ब का डर बेठाऐं, ताकि वोह हमेशा अल्लाह पाक से और जहन्नम के अजा़ब से बचने की कोशिश करें। इरशादे रब्बानी है कि “ऐ ईमान वालो! अपने आप को और अपने…

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राजनीतिक 

कब तक चलेगा किसानों का आंदोलन।

साजीद महमूद शेख,मीरा रोड जिला ठाणे महोदय,किसानों ने अब कृषि कानूनों के खिलाफ अपना आंदोलन तेज कर दिया है। वे अब संसद के मानसून सत्र के दौरान प्रतिदिन संसद के बाहर प्रदर्शन करेंगे । जाहिर है कि इन प्रदर्शनों से किसान अब देश का ध्यान फिर से आंदोलन की ओर लाना चाहते हैं। लेकिन सवाल यह है कि किसान आंदोलन कब तक चलेगा। यह चिंता की बात है। इस आंदोलन को सात महीनों से अधिक समय हो चुका है। और अभी तक सरकार या किसानों की ओर से कोई ठोस…

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