गोरखपुर 

इमाम तकी, हज़रत औरंगज़ेब, इमाम तबरानी, मुफ़्ती नक़ी व टीपू सुल्तान की याद में हुई फातिहा ख़्वानी

गोरखपुर। सब्जपोश हाउस मस्जिद जाफ़रा बाज़ार व चिश्तिया मस्जिद बक्शीपुर में शनिवार को हज़रत इमाम सैयद मोहम्मद अल तकी रदियल्लाहु अन्हु, ग्यारहवीं सदी हिजरी के मुजद्दिद हज़रत औरंगज़ेब आलमगीर अलैहिर्रहमां, आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा खां के वालिद हज़रत अल्लामा मौलाना मुफ़्ती नक़ी अली खां अलैहिर्रहमां, हज़रत सुल्तान फ़तेह अली खान ‘टीपू सुल्तान’ अलैहिर्रहमां व हज़रत इमाम सुलैमान अल तबरानी अलैहिर्रहमां के उर्स-ए-पाक के मौके पर क़ुरआन ख़्वानी, फातिहा ख़्वानी व दुआ ख़्वानी की गई।

सब्जपोश हाउस मस्जिद जाफ़रा बाज़ार के इमाम हाफ़िज़ रहमत अली निज़ामी व चिश्तिया मस्जिद के इमाम हाफ़िज़ महमूद रज़ा क़ादरी ने कहा कि इमाम सैयद तकी हुसैनी सादात हैं। आप अइम्मा अहले बैत के नौवें इमाम हैं। आप बहुत बड़े आलिम, वली, परहेज़गार, इबादतगुजार व दानदाता थे। आपने पूरी ज़िन्दगी दीन-ए-इस्लाम की खिदमत में गुजारी। आपका विसाल 29 ज़िल क़ादा को हुआ। मजार इराक में है।

वहीं ग्यारहवीं सदी हिजरी के मुजद्दिद हज़रत औरंगज़ेब आलमगीर बहुत बड़े आलिम, वली, तहज्जुद गुज़ार, परहेज़गार, इंसाफ पसंद, अल्लाह से डरने वाले, हलाल रिज्क खाने वाले अज़ीम शहंशाह थे। आप हिन्दुस्तान की तामीर, तरक़्क़ी और खुशहाली में नुमाया हैसियत रखते हैं। ‘फ़तावा आलमगीरी’ आपका अज़ीम कारनामा है। आपका विसाल 28 ज़िल क़ादा 1118 हिजरी (20 फरवरी 1707) में हुआ। मजार औरंगाबाद, महाराष्ट्रा में है।

उन्होंने कहा कि आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा खां के वालिद हज़रत नक़ी अली खां हिन्दुस्तान के नामवर आलिम, वली, जंगे आज़ादी के अज़ीम मुजाहिद, इबादतगुजार, परहेज़गार, लेखक, शायर व दानदाता थे। आपका अख़लाक निहायत आला था। पूरी ज़िन्दगी रसूल-ए-पाक की पैरवी और इश्क़े रसूल में गुज़री। आप गरीबों व मिस्कीनों के साथ बहुत अच्छा बर्ताव करते थे। आपका दर्स मशहूर था। तलबा दूर-दूर से आपके पास इल्म की प्यास बुझाने आते थे। आपको मुल्क में अंग्रेजी इक़्तिदार से सख्त नफ़रत थी। आपने पूरी ज़िन्दगी अंग्रेजों की मुखालिफत की और अंग्रेजी इक़्तिदार को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए हमेशा लगे रहे। आपने उर्दू, अरबी, फ़ारसी में कई किताबें लिखीं। आपका विसाल 29 ज़िल क़ादा 1297 हिजरी में हुआ। मजार बरेली में है।

वहीं हज़रत टीपू सुल्तान शहीद मैसूर के सबसे महान शासक थे। हज़रत टीपू सुल्तान का जन्म कर्नाटक के देवनाहल्ली में हुआ था। आपका पूरा नाम सुल्तान फ़तेह अली खान था। आपको मैसूर के शेर के रूप में जाना जाता है। योग्य शासक के अलावा टीपू एक विद्वान, कुशल योग्य सेनापति, बहुभाषी, लेखक और कवि भी थे। दुनिया में मिसाइल का पहला प्रयोग हज़रत टीपू सुल्तान ने किया। वतन के लिए अंग्रेजो से लड़ाई लड़ी। हज़रत टीपू सुल्तान को इंसाफ पसंद सुल्तान व देशभक्त के रुप में हमेशा याद किया जायेगा। आपकी शहादत
28 ज़िल क़ादा 1213 हिजरी में हुई। मजार श्रीरंगपट्टनम, कर्नाटक में है।

हज़रत इमाम सुलैमान अल तबरानी दीन-ए-इस्लाम की अज़ीम शख्सियत थे। आप बहुत बड़े आलिम, वली, लेखक, परेहज़गार, इबादतगुजार थे। आपने पूरी ज़िन्दगी दीन-ए-इस्लाम की खिदमत की। आपने कई मशहूर किताबें लिखीं। आपका शुमार दीन-ए-इस्लाम के अज़ीम रहनुमा के तौर पर किया जाता है। आपका विसाल 29 ज़िल क़ादा 360 हिजरी में हुआ। मजार ईरान में है।

अंत में सलातो सलाम पढ़कर मुल्क में अमनो अमान व तमाम तरह की बीमारियों से शिफा मांगी गई। फातिहा ख़्वानी में शारिक अली, सैफ अली, फुजैल अली, फैजान, सज्जाद अहमद, मुख्तार अहमद, शाहिद अली, तारिक अली, असलम खान, आरिफ खान, आसिफ रज़ा, कारी सद्दाम, हाफ़िज़ आमिर हुसैन, अजमत अली, रहमत अली, मोहम्मद फैज, मोहम्मद ज़ैद, हाफ़िज़ उमर आदि शामिल रहे।

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