गोरखपुर 

सहाबी-ए-रसूल हज़रत साद व इमाम बुसीरी का मनाया उर्स-ए-पाक

गोरखपुर। बुधवार को चिश्तिया मस्जिद बक्शीपुर व सब्जपोश हाउस मस्जिद जाफ़रा बाज़ार में सहाबी-ए-रसूल हज़रत सैयदना साद बिन अबी वक़्क़ास रदियल्लाहु अन्हु व ‘कसीदा बुर्दा शरीफ़’ के रचियता हज़रत इमाम सरफुद्दीन अबू अब्दुल्लाह मोहम्मद अल बुसीरी अलैहिर्रहमां का उर्स-ए-पाक अकीदत व एहतराम के साथ मनाया गया। क़ुरआन ख़्वानी, फातिहा ख़्वानी व दुआ ख़्वानी की गई।

चिश्तिया मस्जिद के इमाम हाफ़िज़ महमूद रज़ा क़ादरी ने कहा कि हज़रत सैयदना साद मक्का में पैदा हुए। बचपन में आपको तीरंदाजी का शौक था। जवान होने के बाद आप अक्सर वक्त तीर-कमान बनाने, उसे ठीक करने में और तीरंदाजी के अभ्यास में गुजारते। आप ईमान लाने वाले पहले आठ असहाब में शामिल हैं। आपके ज़िन्दगी में ही रसूल-ए-पाक हज़रत मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम ने आपको जन्नती होने की खुशखबरी दे दी। आप जंगे बद्र, जंगे उहद, जंगे खंदक, जंगे ख़ैबर, फतह मक्का और दीगर जंगों में शरीक हुए। हज़रत साद ने मुसलमानों की तरफ से सबसे पहला तीर चलाया। आपकी दुआ अल्लाह तआला रद्द नहीं फरमाता था। तीस हिजरी में हज़रत सैयदना उस्माने गनी रदियल्लाहु अन्हु के जमाने में आप चंद साथियों के साथ चीन तशरीफ ले गये और बादशाह की इजाजत से गुआंगज़ौ, चीन की सबसे पहली मस्जिद तामीर की और तीलामे दीन करते रहे। आपसे करीब 271 हदीस रिवायत हैं। आपका विसाल 25 ज़िल क़ादा 54 हिजरी में हुआ। मजार गुआंगज़ौ, चीन में है। जहां लाखों अकीदतमंद हाजरी देते हैं।

सब्जपोश हाउस मस्जिद जाफ़रा बाज़ार के इमाम हाफ़िज़ रहमत अली निज़ामी ने कहा कि हज़रत इमाम सरफुद्दीन अबू अब्दुल्लाह मोहम्मद अल बुसीरी ने अपने गांव में क़ुरआन-ए-पाक की तालीम हासिल की और हाफ़िज़-ए-क़ुरआन हुए। फिर काहिरा में अरबी, लिटरेचर और तवारीख़ की तालीम हासिल की। तीस साल की उम्र में रसूल-ए-पाक की शान में कसीदा लिखना शुरु किया। जब आप पर फालिज का अटैक हुआ तो ‘कसीदा बुर्दा शरीफ़’ लिखना शुरु किया। कसीदा बुर्दा रसूल-ए-पाक की बारगाह में कबूल हुआ और बहुत मशहूर हुआ। रसूल-ए-पाक ने ख्वाब में आपको अपनी मुबारक चादर अता फरमाई। जिस वजह से इसे कसीदे का नाम ‘कसीदा बुर्दा’ पड़ गया। पूरी दुनिया के आशिके रसूल ‘कसीदा बुर्दा शरीफ़’ पढ़कर दिलों की राहत हासिल करते हैं। ‘कसीदा बुर्दा शरीफ़’ में 160 अशआर हैं। आपका विसाल 25 ज़िल क़ादा 694 हिजरी में हुआ। मजार जेंडरिया, मिस्र में है। जहां अकीदतमंदों का तांता लगा रहता है।

अंत में सलातो सलाम पढ़कर मुल्क में अमनो शांति व तमाम बीमारियाों से शिफा की दुआ मांगी गई। उर्स-ए-पाक में शारिक अली, सैफ अली, फुजैल अली, फैजान, सज्जाद अहमद, मुख्तार अहमद, आसिफ रज़ा, कारी सद्दाम, हाफ़िज़ आमिर हुसैन, अजमत अली, रहमत अली, मोहम्मद फैज, मुहम्मद ज़ैद हाफ़िज़ उमर, शाहिद अली, तारिक अली, असलम खान, आरिफ खान आदि लोग शामिल हुए।

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