धार्मिक 

जेल भरो आंदोलन ही ज़रूरी क्यूं……?

5 सालों से हम कम्प्लेंट​, एफ़​. आई. आर​. और मेमोरंडम (ज्ञापन​) बार बार दे रहे हैं, विरोध प्रदर्शन और रैलियां भी हो रही हैं, मगर उनका कोई ख़ास असर नही नज़र आता, जबकि इन 5 सालों में इस्लाम के पैग़म्बर और इस्लाम के ख़िलाफ़ नफ़रत और भ्रम फैलाने वाली अशिष्ट और अभद्र टिप्पणियों की बाढ़ सी आई है, कार्यवाही ना होने की असल वजह सरकार से मिलने वाला समर्थन और सुरक्षा बल्कि सरकार की शह और सहयोग है, सरकार इन अपराधियों को सुरक्षा और सहयोग देती है, जबकि मुसलमानों को जेल का डर दिखाकर डराने और दबाने की कोशिश करती है, मुसलमान चाहते तो यही थे कि इस्लामी क़ानून के अनुसार ऐसे अपराधियों और समाज के दुशमनों को सख़्त सज़ा दी जाये, मगर हम भारत जैसे एक लोकतांत्रिक देश में रहते हैं, यहां के संविधान के दायरे में रहते हुवे ही कोई क़दम उठा सकते हैं, इसलियें 11 अप्रैल 2021 को दिल्ली की मीटिंग में धर्म, समाज और क़ानून के जानकरों और ज़िम्मेदारों ने सुप्रीम कोर्ट के वकील महमूद पराचा जैसे क़ानून के जानकार और एक्स्पर्ट की मौजूदगी में यह तय किया कि हम क़ानून से मिलने वाले अधिकारों को इस्तेमाल करते हुए देशव्यापी सतह पर जेल भरो आंदोलन की शुरूआत करेंगे और सरकार को बतायेंगे कि हम जेल जाने से नहीं डरते।
अल्लाह अपने नबी के चाहने वालों को अपने अपने शहरों में ज़ियादा से ज़ियादा तादाद के साथ अपने नबी के मान – सम्मान और मर्यादा – प्रतिष्ठा की रक्षा केलिये गिरफ़्तारी देने का मौक़ा और हिम्मत दे।

नबी की चौखट का एक छोटा सा कुत्ता
क़मर ग़नी उसमानी क़ादरी चिश्ती

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