गोरखपुर 

रोज़ा रखकर दूसरे की भूख प्यास का अहसास होता है: कारी अख़्तर

मदीना मस्जिद नौतन निकट मेडिकल कालेज के इमाम कारी अख़्तर रज़ा नूरानी ने बताया कि साल के बारह माह में रमज़ान सबसे खास महीना होता है। पूरे महीने लोग रोजा रखकर अल्लाह की इबादत करते हैं। नेक काम करते हैं। इस माह में नेकी करने वालों को सवाब बहुत अधिक मिलता है। अल्लाह का जिक्र करें। जकात ,सदका, खैरात व फित्रा अदा करें। लोगों को इस माह अपने अंदर के गुस्से व बुराईयों को निकाल देना चाहिए। यह माह एक तरह से ट्रेनिंग का माह होता है। रोजा रखकर दूसरे की भूख प्यास का अहसास होता है। इसलिए तमाम मुसलमानों को चाहिए कि अल्लाह का शुक्र अदा करते हुए खुशदिली से रोजा रखें। अल्लाह के इनाम के हकदार बनें।कोरोना संक्रमण के मद्देनज़र मास्क पहनें। गाइडलाइन का पालन करें।

रमज़ान में खूब करें इबादत : कारी अंसारुल

मक्का मस्जिद मेवातीपुर के इमाम कारी अंसारुल हक क़ादरी ने बताया कि रोजा रखने में बहुत सी हिकमतें हैं। रोजा रखने से भूख और प्यास की तकलीफ का पता चलता है। जिससे खाना और पानी की कद्र मालूम होती है।इंसान अल्लाह का शुक्र अदा करता है। रोजा से भूखों और प्यासों पर मेहरबानी का ज़ज़्बा पैदा होता है। मालदार अपनी भूख प्यास याद करके गरीब मोहताज की भूख का पता लगाता है। रोजा से भूख को बर्दाश्त करने की आदत पड़ती है। अगर कभी खाना मयस्सर न हो तो इंसान घबराता नहीं है और अल्लाह की नाशुक्री नहीं करता। रमज़ान में खूब इबादत करें और इस माह-ए-मुबारक के फैज़ से मालामाल हों। कोरोना बीमारी रोकने में प्रशासन की हरसंभव मदद करें।

रोज़ा बहुत सी बीमारियों का इलाज़ है: हाफ़िज़ रहमत

सब्जपोश हाउस मस्जिद जाफ़रा बाज़ार के इमाम हाफ़िज़ रहमत अली निज़ामी ने बताया कि डॉक्टर व हकीम बताते हैं कि रोजा बहुत सी बीमारियों का इलाज है। इससे कुव्वते हाजमा बढ़िया हो जाता है। रोजा ब्लड प्रेशर, कैंसर, फालिज, मोटापा, चमडे़ की बीमारियों और भी बहुत सारी बीमारियों में फायदेमंद है।विशेषज्ञों का इस पर रिसर्च है। रोजा सिर्फ इंसान ही की इबादत है। फरिश्ते और अन्य मखलूक इसमें शामिल नहीं। रोजा रखने की सबसे बड़ी हिकमत यह है कि इससे परेहजगारी मिलती है जैसा कि अल्लाह का फरमान है। कोविड 19 गाइडलाइन का पालन करें।

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