राष्ट्रीय 

बढ़ती हुवी अशिष्ट और अपमानजनक टिप्पणियों के ख़िलाफ़ तह़रीक फ़रोग़े इस्लाम रमज़ान की इक्कीस तारीख़ को राष्ट्रीय स्तर पर जेल भरो आंदोलन की शुरुआत करेगी: क़मर ग़नी उसमानी

इस्लाम के पैग़म्बर ह़ज़रत मुह़म्मद की शान में योजनाबद्ध तरीक़े से की जाने वाली अशिष्ट और आपमान जनक टिप्पणियों और ईश – निंदाओं की रोक थाम और ऐसे अपरधियों को अंजाम तक पहुंचाने केलिये तह़रीक फ़रोग़े इस्लाम ने व्यवस्थित और संगठित अभियान और मुहिम शुरू की।

2014 में भाजपा के सत्ता में आने के बाद से, इस्लाम के पैगंबर के ख़िलाफ़​ आपमान जनक टिप्पणियों और ईश – निंदाओं का एक सिलसिला चल रहा है। इससे पहले ये टिप्पणियां और निंदायें किसी एक व्यक्ति द्वारा सोशल मीडिया और प्रिंट मीडिया के माध्यम से की जाती थीं। अब हाल ये है कि प्रेस क्लब ऑफ इंडिया जैसे महत्वपूर्ण स्थानों पर, बहुत से लोग इकट्ठा होकर इस्लाम और इस्लाम के पैग़म्बर के ख़िलाफ़ अपमानजनक और अमर्यादित टिप्पणियां करते हैं।
ये बात अब किसी से छुपी नहीं रही कि ये अभद्रतायें और अशिष्टतायें कोई आकस्मिक घटनायें नहीं बल्कि आर. एस. एस. और उस जैसे असामाजिक और कटरपंथी संगठनों की सोची समझी साज़िशों और जान बूझकर की गई कोशिशों का नतीजा हैं। यही वजह है कि सैकड़ों की तादाद में कम्प्लैंट, एफ़. आई. आर. और ज्ञापन देने के बावजूद किसी अपराधी पर कोई क़ानूनी कर्यवाही नहीं हो रही है। इसलिये अब ज़रूरी हो गया है कि मुसलमानों की कोशिशें सिर्फ़ एफ़. आई. आर. और ज्ञापन देने तक सीमित ना रहें, बल्कि हिंदुस्तानी क़ानून से से मिलने वाले धार्मिक और नागरिक अधिकारों को काम में लाते हुए दूसरी बड़ी और उचित कोशिशें भी करते रहें, चाहे उसके लिये कैसी भी रुकावटों, मुश्किलों और क़ुर्बानियों से गुज़रना पड़े, क्यूंकि मुसलमान अपने जान और माल पर हमले बरदाश्त कर सकते हैं मगर जान और जहान से ज़ियादा प्यारे नबी ह़ज़रत मुह़म्मद के मान – सम्मान के ख़िलाफ़ एक भी लफ़्ज़ बरदाश्त नहीं कर सकते, ये ख़यालात ज़ाहिर किये तह़रीक फ़रोग़े इस्लाम की तरफ़ से आयोजित एक एमर्जेंसी मीटिंग में तह़रीक फ़रोग़े इस्लाम के संस्थापक और अध्यक्ष जनाब क़मर ग़नी उस्मानी क़ादरी चिश्ती ने, जो क़स्बा अमेठी, लखनऊ में स्थित दरगाह सरकार बंदगी के नायब गद्दी नशीन भी हैं। उन्होंने कहा कि अब हम ऐसी बदतमीज़ियां – बेइज़्ज़तियां और बरदाश्त नहीं कर सकते, बल्कि हम अब इस्लाम और इस्लाम पैग़म्बर ह़ज़रत मुह़म्मद के मान – सम्मान की रक्षा केलिये किसी भी क़ुरबानी और मुश्किल से मुश्किल हालात से गुज़रने केलिये तैयार हैं। तह़रीक फ़रोग़े इस्लाम के जनरल सेक्रेटरी और दावत व तबलीग़ विभाग के सद्र मुफ़्ती मुह़म्मद शाहिद बरकाती ने अपने ख़यालात इन अलफ़ाज़ में ज़ाहिर किये कि अगर अब भी हमने अपने रसूल ह़ज़रत मुह़म्मद के मान – सम्मान की रक्षा के अहम और संवेदनशील मुद्दे के बजाय अपनी जान, माल, इज़्ज़त और आबरू को अहमियत देना ना छोड़ा तो बहुत जल्द वह दौर भी आयेगा जब इस्लाम और मुसलमानों के इन दुशमनों से ना हमारे जान और माल सुरक्षित रहेंगे ना इज़्ज़त और आबरू सलामत रहेगी, वैसे भी ये दुनिया और इसकी हर चीज़ एक ना एक दिन मिट जाने वाली है, आख़िरत हमेशा की है, और हमारी दोनों जहान की कामयाबी अपने प्यरे नबी ह़ज़रत मुह़म्मद की शान और इज़्ज़त की रक्षा केलिये मरने – जीने में है, हमारे नबी ही हमें आख़िरत में काम आने और अज़ाब से बचाने वाले हैं।

मीटिंग में देश भर से आये हुए आलिमों और बुद्धिजीवियों और राजनीतिक व क़ानूनी मामलों के विशेषज्ञों ने इस बात पर दुख व आक्रोश ज़ाहिर करते हुए कहा कि कई सालों से ये अभद्र और अशिष्ट टिप्पणियां की जा रही हैं मगर अपराधियों पर कोई क़ानूनी और न्याय संगत कर्यवाही करने के बजाय उनको सुरक्षा और समर्थन दिया जा रहा है, इसलिये अब हम अपने क़ानूनी अधिकारों को काम में लाते हुए कोई बड़ा फ़ैसला लें, मीटिंग में मौजूद सभी लोगों ने सर्वसहमति से ये तय किया रमज़ान की इक्कीस तारीख़ को हम पूरे देश में जेल भरो आंदोलन छेड़ेंगे, जिसकी शुरूआत ख़ुद तहरीक फ़रोग़े इस्लाम के संस्थापक क़मर उस्मानी दिल्ली से अपनी गिरफ़्तारी देकर करेंगे, सभी मौजूद लोगों ने अपील की कि देश भर के पैग़म्बर प्रेमी अपने अपने शहरों में गिरफ़्तारियां देकर अपने नबी से अपनी मोहब्बत और उनके लिये मरने मिटने की भावना ज़ाहिर करें। ख़ासकर धर्म प्रमुखों और आलिमों से अपील की गई कि वे लोग इस मुहिम केलिये आम मुसलमानों को तैयार करने के अलावा ख़ुद भी आगे आकर इस मुहिम में शामिल हों।

अक़ील अहमद फ़ैज़ी
प्रचार – प्रसार विभाग
तहरीक फ़रोग़े इस्लाम, दिल्ली

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