गोरखपुर 

गोरखपुर: नरसिंहानंद के विरोध में हिन्दू-मुस्लिम उतरे मैदान में, गिरफ्तारी की मांग

गोरखपुर। शिवशाक्ति धाम डासना के पुजारी नरसिंहानंद सरस्वती के खिलाफ लोगों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। मंगलवार को हिन्दू मुस्लिम एकता कमेटी, ऑल इंडिया कौमी एकता कमेटी, एआईएमआईएम ने अमन के दुश्मन नरसिंहानंद के विरोध में मोर्चा खोल दिया।जिलाधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन किया। नरसिंहानंद की गिरफ्तारी व कड़ी सज़ा दिए जाने की मांग की। नरसिंहानंद मुर्दाबाद का नारा लगाया। राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट अभिनव रंजन श्रीवास्तव को सौंपा।

शाकिर अली सलमानी ने कहा कि धर्म-कर्म के क्षेत्र में भारत का बहुत ऊंचा स्थान है। गंगा जमुनी तहजीब यहां की पहचान है। अनेकता में एकता यहां की खूबी है। सभी एक दूसरे की आस्था व भावनाओं की कद्र व सम्मान करते हैं। लेकिन देश में कुछ ऐसे भी लोग हैं जो हिंदू मुस्लिम भाईचारा तोड़ना चाहते हैं। जिसे हम कामयाब नहीं होने देंगे। पैग़ंबर-ए-आज़म हज़रत मोहम्मद (सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम) साहब हर मुसलमान की आन, बान, शान व जान हैं। उनकी व इस्लाम धर्म की शान में तौहीन करने वाला शख्स अमन शांति ही नहीं देश की एकता, अखंडता व भाईचारे का दुश्मन है। पैगंबर व इस्लाम धर्म की शान में गुस्ताखी करने वाले अपमानित शख्स को सज़ा मिलनी ही चाहिए।

अशफाक हुसैन मेकरानी ने कहा कि हमारी सरकार से मांग है कि समाज व देश विरोधी शख्स की जल्द गिरफ्तारी की जाए और फांसी की सजा दी जाए। इस बाबत कानून भी बनाया जाए ताकि कोई भी शख्स किसी भी धर्म की मुकद्दस हस्तियों व धर्मग्रंथों का अपमान न कर सके।

एआईएमआईएम के जिलाध्यक्ष मो. इस्लाम व समीर सिद्दीकी ने कहा कि देश का माहौल खराब करने के लिए नरसिंहानंद सरस्वती ने यह बात बोली है। उसकी तत्काल गिरफ्तारी होनी चाहिए।

कारी जमील अहमद मिस्बाही व गौतम लाल श्रीवास्तव ने कहा कि पैगंबर हज़रत मोहम्मद साहब के बारे में नरसिंहानंद सरस्वती ने जो शब्द इस्तेमाल किया है उसकी जितनी भी निंदा की जाए कम है।नरसिंहानंद के ख़िलाफ सरकार को जल्द एक्शन लेना चाहिए ताकि देश का अमन बरकरार रहे। नरसिंहानंद के ख़िलाफ हिन्दू मुसलमान सभी में आक्रोश है।

विजय कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि नरसिंहानंद ने पैगंबर हज़रत मोहम्मद साहब के बारे में इतना असभ्य व गैर जिम्मेदारान बयान देकर हिन्दू मुसलमान दोनों को दुखी व आक्रोशित किया है। यह राष्ट्र हित में अच्छा नहीं है। सारे धर्मों के मजहबी पेशवा व धर्मग्रंथों का सम्मान होना चाहिए यही हमारा संविधान कहता है।

ज्ञापन सौंपने वालों में मोहसिन खान ‘गोल्डी’, इरफान खान, मोहम्मद शमीम, नाज़मा, आस्मा, आसिया खातून, नीलम मिश्रा, नौशाद, मो. कैश अंसारी, यासिर अली, योगेंद्र कुमार, नूर मो. सिद्दीकी, सुब्हानल्लाह, हाफ़िज़ मुस्तकीम, हाफ़िज़ मोईनुद्दीन, फैसल कुरैशी, यासीन अली, हाफ़िज़ अर्शी सलमानी, नवाब अज़ीम, हाफ़िज़ फिरोज, रज्जाक, हुकुमदा मो. शादाब, सेराज अहमद, सैफ अली, ई. मिन्नतुल्लाह, मो. रज़ा, अमन केशवानी, हाजी मोनू खां, तबरेज सिद्दीकी, मो. आतिफ, प्रदीप कुमार, साहिल अली, दिलशाद अहमद, अबरार अहमद, गुलाम जीलानी, आफताब आलम, शाहिद अली, असरार आलम, ज्ञानचंद कुशवाहा, गुलाम वारिस, हाफ़िज़ वारिस सलमानी, असरार आलम, वीके गुप्ता, मो. अयान, एहसान अंसारी, रोहित, फखरुद्दीन, रेहान, दिलशाद अहमद, मो. वसीम, आसिफ सिद्दीकी, कारी आबिद, कामरान अकमल आदि मौजूद रहे।

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