धार्मिक सामाजिक 

1अप्रैल: क्या कोई मुसलमान भी झूट बोल सकता है ?

मन्क़ूल है :
 मशहूर मुग़ल बादशाह औरंगज़ेब आ़लमगीर के उस्तादे मोह़्तरम, ह़ज़रते अ़ल्लामा अह़मद जीवन رَحْمَۃُ اللّٰہ ِ عَلَیْہ तशरीफ़ फ़रमां थे कि एक शख़्स ने आ कर कहा : ह़ुज़ूर ! आप की ज़ौजए मोह़्तरमा बेवा हो गई हैं । येह सुन कर ह़ज़रते अ़ल्लामा अह़मद जीवन رَحْمَۃُ اللّٰہ ِ عَلَیْہ सख़्त परेशानी के आ़लम में कुछ सोचने लगे । आप की परेशानी देख कर वहां मौजूद एक शख़्स ने कहा : ह़ुज़ूर ! आप तो बिला वजह परेशान हो रहे हैं, जब आप ज़िन्दा हैं, तो आप की ज़ौजा कैसे बेवा हो सकती हैं ? तो ह़ज़रते अ़ल्लामा अह़मद जीवन رَحْمَۃُ اللّٰہ ِ عَلَیْہ ने फ़रमाया : मैं येह नहीं सोच रहा कि मेरी ज़ौजा कैसे बेवा हुई, मैं तो येह सोच कर परेशान हूं कि क्या कोई मुसलमान भी झूट बोल सकता है ?
          आज 1अप्रैल है, हो सकता है किसी ने पहले ही से येह जे़हन बना लिया हो कि मैं इस साल फ़ुलां के साथ फ़ुलां झूट बोल कर उस को बे वुक़ूफ़ बनाऊंगा । आइये ! हाथों हाथ अपने रब्बे करीम की बारगाह में अपने तमाम गुनाहों बिल ख़ुसूस झूट बोलने से सच्ची तौबा करते हैं ।
तहरीक फ़रोग ए इस्लाम

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