धार्मिक 

मर्द और औरत की नमाज़ का फर्क (2)

लेखक: मह़मूद रज़ा क़ादरी,चिश्तिया मस्जिद गोरखपुर

औरत के लिए क्या हुक्म है।

तकबीरे तहरीमा:-

1:- अपनी हथेलियां आस्तीन या चादर के अंदर छुपा कर रखे!

2:- अपने दोनों हाथ सिर्फ कंधो तक उठाए

क्याम यानी खड़ा होना

1:- पिस्तान ( छाती) के निचे हाथ बांधे

2:- बांए हाथ की हथेली को पिस्तान ( छाती) के निचे रखकर उसकी पीठ पर दांए हाथ की हथेली रखे!
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रुकू यानी झुकना

1:- सिर्फ इतना झुके की हाथ घुटनों तक पहुंच जाए

2:- अपना सर पीठ के बराबर से ऊंचा रखे

3:- हाथ पर टेक न लगाए यानी वज़न न करे।

4:- हाथ को घुटनों पर रखे पकड़े नहीं

5:- हाथ की उंगलियां फैलाए नहीं बल्कि मिली हुई रखे

6:- अपनी टांगे झुकी हुई रखे मर्दों की तरह सिधा ना करे ।

सज्दा यानी सर का ज़मीन पर रखना

1:- सिमट कर सज्दा करना

2:- बाज़ू को करवट से पेट को रान से रान को पिंडली से और पिंडली को ज़मीन से मिला दे

3:- कलाईयां और केहुनियां ज़मीन पर बिछाए यानी ज़मीन से लगाए
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जलसा यानी कादा में बैठना

1:- दोनों पावं दाएँ तरफ निकाल दे और बाएं सुरीन (चुतड़) के बल ज़मीन पर बैठे

2:- अपनी हथेलियां रान पर रखे और उंगलियां मिली हुई रखे

नमाज़ के दरमियान आगे से गुजरने वाले को खबर करना

1:- नमाज़ पढ़ रही है और कोई आगे से गुज़रे तो हाथ पर हाथ मार कर खबर करे उसको शरीयत में इस्तलाह कहते हैं।
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नमाज़ ए फज्र

1:- नमाज़ ए फज्र अव्वल वक्त अंधेरे में पढ़ें

2:- औरत फज्र की नमाज़ मर्दों की जमात कायम होने से पहले पढ़े यानी उजाला फैलने से पहले _ बाकी नमाज़ों में मर्दों कि जमात का इंतज़ार करे यानी मर्दों की जमात हो जाने के बाद पढ़े
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नामज़ ए जुमा व ईदैन

1:- औरत पर जुमा व ईदैन की नमाज़ नहीं है।

जरूरी मसायल

औरत भी खड़ी होकर नमाज पढ़े जिन नमाजो़ को मर्द खड़े होकर पढ़ते हैं उन नमाज़ो को खड़े होकर पढ़ना फर्ज है। वाजिब और सुन्नते में मर्दो पर क्याम ( खड़ा) फर्ज है। उन नमाजो़ में औरतों पर भी क्याम (खड़ा)फर्ज है अगर बेगैर तकलीफें शरई उन नमाज़ो को बैठकर पढ़ेगी तो नमाज ना होगी।

तमाम रकात खड़ी होकर पढ़े

1 रकात खड़ी होकर और बाकी रकातो को बैठकर पढ़ेगी तो उन रकातो में क्याम फर्ज का छोड़ना होगा और नमाज़ ना होगी।

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